Papaya Farming Subsidy Bihar 2026 नमस्कार किसान भाइयों आज हम आप के लिए एक बेहतरीन जानकारी लेके आये हैं। बिहार सरकार में किसानों की आय को बढ़ाने के लिए राज्य में की खेती करने को प्रति हेक्टेयर 45,000 रुपए का अनुदान (Subsidy) देने जा रही है। विकास योजना के जरिये किसानों को लाभ दिया जायेगा। यह योजना “एकीकृत बागवानी विकास मिशन” (Integrated Horticulture Development Mission) के तहत चलाई जा रही है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार दोनों का संयुक्त योगदान है। वर्ष 2025-26 के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू हो गया है।
🌿 पपीता क्यों है किसानों के लिए फायदेमंद फसल?
बात करें पपीता की तो यह एक बेहतरीन फसल है। जो कम लगत में और बहुत ही कम समय में किसानों को अच्छी कमाई देने वाला फसल है। चूँकि पपीता को लोग फल और सभी दोनों तरीके से खाते हैं इसलिए पपीता का माँग सालों भर रहता है।
पपीते की खासियतें:
✅ एक बार पौधे लगाने के बाद 2-3 साल तक लगातार फल देता है।
✅ शुरुआती लागत कम और उत्पादन अधिक।
✅ बाजार में लगातार मांग।
✅ पौष्टिकता से भरपूर — विटामिन A, C, और एंटीऑक्सीडेंट का बेहतरीन स्रोत।
✅ औद्योगिक उपयोग – पपेन एंजाइम दवा, कॉस्मेटिक और फूड इंडस्ट्री में इस्तेमाल होता है।
🧩 पपीता विकास योजना का उद्देश्य
आइये जानते हैं बिहार सरकार ने ” पपीता विकास योजना ” की शुरुआत किन उद्देश्यों से की है:
- राज्य में पपीते की खेती का क्षेत्रफल बढ़ाना।
- पपीता के जरिये किसानों की आमदनी में वृद्धि सुनिश्चित करना।
- पपीता के फलों की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार लाना।
- पपीता की खेती के जरिये ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना।
- बिहार में बागवानी फसलों को अधिक से अधिक बढ़ाना और बागवानी के जरिये किसानों को पारंपरिक खेती से लाभकारी खेती की ओर ले जाना।
💰 पपीते की खेती पर कितना अनुदान मिलेगा?
पपीता विकास योजना के जरिये पपीता की खेती करने वाले किसानों को सरकार के द्वारा 60% तक अनुदान मिलता है। किसानों के लिए प्रति हेक्टेयर पपीता उत्पादन की इकाई लागत ₹75,000 निर्धारित की गई है।
| अनुदान का प्रकार | प्रतिशत | राशि (प्रति हेक्टेयर) |
|---|---|---|
| केंद्र सरकार का अंशदान | 40% | ₹30,000 |
| राज्य सरकार का टॉप-अप | 20% | ₹15,000 |
| कुल अनुदान | 60% | ₹45,000 |
कुल ₹45,000 की राशि किसानों को दो किस्तों में दी जाएगी:
- पहली किस्त: ₹27,000 प्रति हेक्टेयर
- दूसरी किस्त: ₹18,000 प्रति हेक्टेयर
📅 योजना की अवधि और बजट
- योजना अवधि: 2025-26 से 2026-27 (2 वर्ष)
- कुल लागत: ₹1 करोड़ 50 लाख 75 हजार
- 2025-26 में निकासी व व्यय: ₹90 लाख 45 हजार
केंद्र और राज्य सरकार का अंशदान 40-40 प्रतिशत है, जबकि राज्य योजना मद से 20% अतिरिक्त “टॉप-अप” प्रावधान किया गया है। इससे किसानों को अधिक लाभ मिलेगा और उन्हें अपने खेतों में बागवानी को बढ़ावा देने का प्रोत्साहन मिलेगा।
🌾 पपीते की खेती के लिए आवश्यक जानकारी
📍 खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी
- हल्की, दोमट या रेतीली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त।
- मिट्टी का pH मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
- जल निकासी की व्यवस्था उत्तम होनी चाहिए।

🌦️ जलवायु
- पपीता उष्णकटिबंधीय (Tropical) फसल है।
- तापमान 22°C से 35°C के बीच सर्वोत्तम होता है।
- अत्यधिक ठंड या पाला पपीते के पौधों को नुकसान पहुंचाता है।
🌱 रोपाई और पौधों की संख्या
- पौधे लगाने की दूरी: 2.2 मीटर x 2.2 मीटर
- प्रति हेक्टेयर पौधों की संख्या: लगभग 2500 पौधे
💧 सिंचाई व्यवस्था
- पहली सिंचाई पौधारोपण के तुरंत बाद करें।
- गर्मी के मौसम में हर 7–8 दिन में सिंचाई आवश्यक है।
- टपक सिंचाई (Drip Irrigation) सबसे बेहतर विकल्प है।
🌼 उर्वरक व देखभाल
- प्रति पौधा 10–12 किलोग्राम गोबर की खाद दें।
- समय-समय पर जैविक उर्वरक और दवाओं का छिड़काव करें।
- कीट एवं रोग नियंत्रण के लिए नीम आधारित दवाओं का प्रयोग करें।
📦 पपीते की पैदावार और कमाई
| विवरण | अनुमानित आँकड़े (प्रति हेक्टेयर) |
|---|---|
| पौधों की संख्या | 2500 |
| प्रति पौधा उत्पादन | 35–40 किलोग्राम |
| कुल उत्पादन | 80,000 – 1,00,000 किलोग्राम |
| बाजार मूल्य (₹20 प्रति किलो) | ₹16,00,000 – ₹20,00,000 |
| कुल लागत (अनुदान सहित) | ₹30,000 – ₹35,000 |
| शुद्ध लाभ (Net Profit) | ₹12 से ₹15 लाख प्रति हेक्टेयर |
📈 नोट: उत्पादन व लाभ मिट्टी, जलवायु और प्रबंधन पर निर्भर करता है।
🏞️ किन जिलों में मिलेगा लाभ?
पपीता विकास योजना का लाभ बिहार के 22 जिलों के किसानों को मिलेगा।
| क्रमांक | जिला |
|---|---|
| 1 | भोजपुर |
| 2 | बक्सर |
| 3 | गोपालगंज |
| 4 | जहानाबाद |
| 5 | लखीसराय |
| 6 | मधेपुरा |
| 7 | बेगूसराय |
| 8 | भागलपुर |
| 9 | दरभंगा |
| 10 | गया |
| 11 | कटिहार |
| 12 | खगड़िया |
| 13 | मुजफ्फरपुर |
| 14 | नालंदा |
| 15 | पश्चिम चंपारण |
| 16 | पटना |
| 17 | पूर्वी चंपारण |
| 18 | पूर्णिया |
| 19 | सहरसा |
| 20 | समस्तीपुर |
| 21 | मधुबनी |
| 22 | वैशाली |
📝 आवेदन प्रक्रिया – ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन
जो किसान इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, वे उद्यान निदेशालय, बिहार सरकार की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
🌐 आवेदन वेबसाइट:
आवश्यक दस्तावेज:
- आधार कार्ड
- भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र / किरायेदारी दस्तावेज
- बैंक पासबुक की छायाप्रति
- पासपोर्ट साइज फोटो
- मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी
आवेदन के चरण:
- वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर जाएं।
- “ऑनलाइन आवेदन” सेक्शन में “पपीता विकास योजना” चुनें।
- मांगी गई जानकारी भरें और दस्तावेज अपलोड करें।
- आवेदन सबमिट करने के बाद आवेदन संख्या सुरक्षित रखें।
- सत्यापन के बाद किसानों को अनुदान की पहली किस्त दी जाएगी।
📱 Agroranto App – किसानों के लिए डिजिटल साथी
आज खेती केवल खेतों तक सीमित नहीं रही, अब तकनीक ने भी इसमें बड़ा योगदान देना शुरू कर दिया है।
इसी दिशा में Agroranto App किसानों के लिए एक क्रांतिकारी प्लेटफ़ॉर्म है।
🚜 Agroranto App क्या है?
- यह एक कृषि उपकरण एग्रीगेटर ऐप है, जहाँ किसान अपने खेतों के लिए ज़रूरी यंत्र किराए पर बुक कर सकते हैं।
- किसान चाहें तो अपने उपकरणों को Agroranto Partner App पर लिस्ट करके कमाई भी कर सकते हैं।
📲 किसानों के लिए लाभ
- ट्रैक्टर, ड्रोन, रोटावेटर, सीड ड्रिल जैसे यंत्र किराए पर आसानी से बुक करें।
- ऐप पर खेती से जुड़ी सरकारी योजनाओं और सब्सिडी की जानकारी भी उपलब्ध है।
- 24×7 ऑनलाइन सहायता – किसान को हर सवाल का जवाब तुरंत मिलता है।
- यंत्र बुकिंग से लेकर पेमेंट तक सब कुछ डिजिटल और पारदर्शी।
👉 डाउनलोड करें:
- Agroranto App (किसानों के लिए)
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🧮 पपीते की खेती में सफलता के मुख्य टिप्स
- अच्छे बीजों का चयन करें: हाइब्रिड और रोग प्रतिरोधी बीज चुनें।
- सिंचाई पर ध्यान दें: टपक सिंचाई प्रणाली अपनाएं।
- कीट नियंत्रण करें: जैविक कीटनाशकों का उपयोग करें।
- समय-समय पर फसल निरीक्षण करें।
- स्थानीय बाजार और निर्यातकों से संपर्क बनाए रखें।
- Agroranto App से किराए पर यंत्र लेकर लागत घटाएं।

🌎 अन्य राज्यों में पपीते की खेती की स्थिति
| राज्य | मुख्य उत्पादन क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|
| महाराष्ट्र | नाशिक, पुणे | हाइब्रिड पपीता उत्पादन में अग्रणी |
| आंध्र प्रदेश | गुंटूर, कृष्णा | उच्च पैदावार और निर्यात |
| उत्तर प्रदेश | वाराणसी, मिर्जापुर | घरेलू बाजार में अधिक मांग |
| गुजरात | भरूच, सूरत | रोग प्रतिरोधी किस्मों की खेती |
| बिहार | पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर | सरकारी अनुदान के साथ तेजी से बढ़ती खेती |
📊 पपीते की खेती से जुड़ी संभावनाएँ
- देश में जूस, जैम, जेली, और पपेन उद्योग तेजी से बढ़ रहा है।
- निर्यात बाजार (UAE, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका) में भारतीय पपीते की मजबूत मांग है।
- पपीते की खेती किसानों के लिए आर्थिक स्वतंत्रता का साधन बन सकती है।
🧠 महत्वपूर्ण सुझाव (Important Tips)
| सलाह | विवरण |
|---|---|
| बीज उपचार | फफूंदनाशक से बीज का उपचार करें। |
| रोग नियंत्रण | रिंग स्पॉट वायरस और फफूंद से सावधानी रखें। |
| खाद प्रबंधन | प्रति हेक्टेयर 200 क्विंटल गोबर की खाद दें। |
| फसल चक्र | सब्जी या दलहन के साथ फसल चक्र अपनाएं। |
| मार्केटिंग | स्थानीय मंडी और ऑनलाइन खरीदारों से जुड़ें। |
पपीते की खेती बिहार के किसानों के लिए एक लाभदायक अवसर है। सरकार के सहयोग और 45,000 रुपए प्रति हेक्टेयर अनुदान से अब किसान आसानी से इस फसल की ओर रुख कर सकते हैं।
कम लागत, कम जोखिम और अधिक मुनाफा — यही इस योजना की खूबी है। सही तकनीक, समय पर सिंचाई और बाज़ार की समझ के साथ किसान पपीते से लाखों रुपए की कमाई कर सकते हैं।
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